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पेट दरà¥à¤¦ किसी को à¤à¥€ हो सकता है, लेकिन शिशॠके लिठयह समसà¥à¤¯à¤¾ गंà¤à¥€à¤° हो जाती है। उसके लिठबोलकर समà¤à¤¨à¤¾ मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है। à¤à¤¸à¥‡ में माता-पिता को उसके हाव-à¤à¤¾à¤µ, रोने व पेट की कोमलता को चेक करके अंदाजा लगाना पड़ता है कि शिशॠको पेट से संबंधित कोई समसà¥à¤¯à¤¾ है। मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ के इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में हम शिशà¥à¤“ं को पेट में होने वाले दरà¥à¤¦ के बारे में ही बात करेंगे। साथ ही यह à¤à¥€ जानेंगे कि माता-पिता किस पà¥à¤°à¤•ार से पता लगा सकते हैं कि शिशॠके पेट में कोई समसà¥à¤¯à¤¾ है। इसके अलावा, शिशॠकी इस समसà¥à¤¯à¤¾ को ठीक करने के लिठकà¥à¤› घरेलू उपचारों के बारे में à¤à¥€ चरà¥à¤šà¤¾ करेंगे।
शिशà¥à¤“ं में पेट दरà¥à¤¦ होने के लकà¥à¤·à¤£ |
शिशà¥à¤“ं में पेट दरà¥à¤¦ होने के कई तरह के लकà¥à¤·à¤£ हो सकते हैं। इनमें से कà¥à¤› के बारे में हम नीचे बता रहे हैं (1)):
शिशॠका ठीक से न खाना: आपका शिशॠठीक से नहीं खाता है या फिर दूध पीते-पीते बीच में ही छोड़ देता है।
शिशॠका पेट पर हाथ रगड़ना: अगर शिशॠखाने के बाद पेट पर हाथ फेरे, तो वह दरà¥à¤¦ की वजह से हो सकता है।
शिशॠदरà¥à¤¦ को वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करते हà¥à¤ अपने पैरों को मोड़े: शिशॠपैरों को पेट की तरफ मोड़ते हैं, जो सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• है। अगर वह à¤à¤¸à¤¾ बार-बार कर रहा है, तो यह पेट दरà¥à¤¦ का संकेत हो सकता है।
शिशॠके पेट पर छूने से दरà¥à¤¦ होना: कà¤à¥€-कà¤à¥€ शिशॠके पेट की मांसपेशियां सखà¥à¤¤ हो जाती हैं, जिस कारण उसे पेट दरà¥à¤¦ होने लगता है। à¤à¤¸à¥‡ में अगर आप उसके पेट पर हाथ à¤à¥€ लगाà¤à¤‚गी, तो उसे दरà¥à¤¦ हो सकता है और वो रोने लग सकता है।
शिशॠका सामानà¥à¤¯ से अधिक रोना: अगर शिशॠसामानà¥à¤¯ से अधिक रोà¤, तो यह पेट दरà¥à¤¦ का कारण हो सकता है।
नोट : ये सà¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ केवल पेट दरà¥à¤¦ के संकेत हैं। अगर कà¤à¥€ à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ में इस पà¥à¤°à¤•ार के लकà¥à¤·à¤£ दिखें, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से जरूर मिलें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि ये किसी अनà¥à¤¯ गंà¤à¥€à¤° बीमारी की तरफ इशारा कर सकते हैं। उदाहरण के लिà¤, दूध पीते वकà¥à¤¤ रà¥à¤• जाना या रà¥à¤•-रà¥à¤• कर दूध पिना हृदय रोग का संकेत हो सकता है।
आगे हम बता रहे हैं कि किन सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में बचà¥à¤šà¥‡ को डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास ले जाना चाहिà¤à¥¤
शिशॠके पेट में दरà¥à¤¦ के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास कब जाना चाहिà¤?
कà¥à¤› सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¤¸à¥€ होती हैं, जिनमें शिशॠकी अवसà¥à¤¥à¤¾ गंà¤à¥€à¤° हो जाती है। à¤à¤¸à¥‡ में उसे तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास ले जाना चाहिà¤à¥¤ नीचे हम कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ ही अवसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं के बारे में बता रहे हैं (2):
मल में खून आना या उलà¥à¤Ÿà¥€ : अगर आपके बचà¥à¤šà¥‡ को मल में खून या उलà¥à¤Ÿà¥€ आने के साथ पेट में दरà¥à¤¦ होता है, तो आप नजरअंदाज न करें।
पेट दरà¥à¤¦ के साथ दसà¥à¤¤ व तेज बà¥à¤–ार: गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤à¤‚टेराइटिस संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने पर शिशॠको दसà¥à¤¤ के साथ पेट में दरà¥à¤¦ होता है। कई बार शिशॠको बà¥à¤–ार à¤à¥€ हो सकता है। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में तà¥à¤°à¤‚त इलाज की जरूरत होती है।
दूध पिलाने और सà¥à¤²à¤¾à¤¨à¥‡ में कठिनाई होना : अगर पेट दरà¥à¤¦ की वजह से बचà¥à¤šà¥‡ को दूध पिलाना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाठया फिर बचà¥à¤šà¤¾ पूरी नींद न ले।
पेट में सूजन : संकà¥à¤°à¤®à¤£, चोट या फिर किसी अनà¥à¤¯ कारण से शिशॠके पेट में सूजन आ सकती है। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में उसे तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास ले जाà¤à¤‚।
शरीर में पानी की कमी : दसà¥à¤¤ होने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है। यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ शिशॠके लिठबहà¥à¤¤ गंà¤à¥€à¤° हो सकती है। अगर बचà¥à¤šà¤¾ बहà¥à¤¤ सà¥à¤¸à¥à¤¤ हो जाता है, तो इसके पीछे सेपà¥à¤¸à¤¿à¤¸ (खून में संकà¥à¤°à¤®à¤£ की गंà¤à¥€à¤° बीमारी) या संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो सकता है।
आइà¤, अब यह जान लेते हैं कि शिशॠको पेट दरà¥à¤¦ किन कारणों से होता है।
शिशॠके पेट दरà¥à¤¦ के कारण और इलाज |
शिशॠको पेट में दरà¥à¤¦ मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से किन कारणों से होता है और उसका इलाज कà¥à¤¯à¤¾ है, इस बारे में हम यहां विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बता रहे हैं।
1. पेट या आंतों में संकà¥à¤°à¤®à¤£
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पेट या आंतों में दरà¥à¤¦, बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण होता है। नीचे पेट दरà¥à¤¦ करने वाले बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के बारे में बताया जा रहा है:
रोटावायरस : रोटावायरस में शिशॠगैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤à¤‚टेराइटिस (आंतों में होने वाली गैस) की वजह से परेशान रहता है (3)। इस वायरस के चलते शिशॠको दसà¥à¤¤ व उलà¥à¤Ÿà¥€ के साथ पेट में तेज दरà¥à¤¦ होता है। इसकी वजह से आपके बचà¥à¤šà¥‡ को थकावट महसूस हो सकती है। बचà¥à¤šà¥‡ में पानी की कमी à¤à¥€ हो जाती है। छह महीने से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उमà¥à¤° वाले बचà¥à¤šà¥‡ दूषित à¤à¥‹à¤œà¤¨ करने के कारण इस वायरस के शिकार होते हैं, जबकि सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने वाले शिशॠको धूल-मिटà¥à¤Ÿà¥€ या दूषित चीजों के संपरà¥à¤• में आने पर यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो सकता है। रोटावायरस संकà¥à¤°à¤®à¤£ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में शिशॠमृतà¥à¤¯à¥ दर का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण है (4)।
इलाज : रोटावायरस में अगर शिशॠको दसà¥à¤¤ होता है तो उसे फà¥à¤²à¥‚à¤à¤¡ चà¥à¤¾à¤¯à¤¾ जाता है। इसके अलावा पानी, चीनी और नमक का घोल तैयार करके à¤à¥€ पिलाया जा सकता है (5)। कोशिश करें कि डबà¥à¤²à¥à¤¯à¥‚à¤à¤šà¤“ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ ओआरà¤à¤¸ ही दें। अगर घर में नमक, चीनी और पानी का घोल तैयार कर रहें हैं, तो दिशा-निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ का बहà¥à¤¤ सटीक रूप से पालन करें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि नमक या चीनी की थोड़ी-सी à¤à¥€ गलत मातà¥à¤°à¤¾ दसà¥à¤¤ की समसà¥à¤¯à¤¾ को बà¥à¤¾ à¤à¥€ सकती है।
सालà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥‡à¤²à¤¾ : इसमें बचà¥à¤šà¥‡ की आंतें संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ होती हैं और पेट में खिंचाव होता है, जिस कारण बचà¥à¤šà¥‡ को पेट में दरà¥à¤¦ होता है (6)। यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ दूषित à¤à¥‹à¤œà¤¨ और दूषित पानी के सेवन से होता है। अगर बचà¥à¤šà¤¾ दूषित चीजों के संपरà¥à¤• में आà¤, तो à¤à¥€ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ पनप सकता है।
इलाज : बचà¥à¤šà¥‡ के आस-पास साफ-सफाई रखने से इस संकà¥à¤°à¤®à¤£ को रोकने में कà¥à¤› हद तक कामयाबी पाई जा सकती है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° इस दौरान इलाज करने के लिये à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ à¤à¥€ दे सकते हैं (7)।
सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤ªà¥à¤Ÿà¥‹à¤•ोकस : इसमें बचà¥à¤šà¥‡ के गले में संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो सकता है। अगर बचà¥à¤šà¤¾ खांसी या फिर सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤ªà¥à¤Ÿà¥‹à¤•ोकस से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के संपरà¥à¤• में आता है, तो यह बीमारी उसे à¤à¥€ हो सकती है। इसलिà¤, अगर आपके गले में खराश है, तो अपने बचà¥à¤šà¥‡ के साथ खेलने से बचें और मासà¥à¤• पहनें।
इलाज : इसमें डॉकà¥à¤Ÿà¤° बचà¥à¤šà¥‡ का इलाज करने के लिठदवाइयां देते हैं। दवाइयां शिशॠकी उमà¥à¤° और बीमारी को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखकर दी जाती हैं (8)।
à¤à¤¡à¥€à¤¨à¥‹à¤µà¤¾à¤¯à¤°à¤¸ : यह वायरस शà¥à¤µà¤¾à¤¸ नलिका के जरिठआंतों में तेजी से फैलता है। अगर बचà¥à¤šà¤¾ नियमित रूप से अपने मà¥à¤‚ह में कोई दूषित वसà¥à¤¤à¥ डालता रहे, तो इस बीमारी का खतरा बॠजाता है। à¤à¤¡à¥€à¤¨à¥‹à¤µà¤¾à¤¯à¤°à¤¸ लंबे समय तक किसी à¤à¥€ चीज पर मौजूद रह सकता है। यह खांसी और छींकने से à¤à¥€ फैल सकता है (9) ।
इलाज : डॉकà¥à¤Ÿà¤° इलाज के तौर पर शिशॠको à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ दे सकते हैं (10)। साथ ही शिशॠको दूषित जगह व वसà¥à¤¤à¥à¤“ं से दूर रखना चाहिà¤à¥¤ माता-पिता को नियमित रूप से हाथ धोने चाहिठऔर बचà¥à¤šà¥‡ के खिलौने समय-समय पर साफ करने चाहिà¤à¥¤
बोटà¥à¤²à¤¿à¤œà¥à¤® : यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ आंत में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण होता है, जो दूषित à¤à¥‹à¤œà¤¨ के सेवन से बचà¥à¤šà¥‡ को हो सकता है। इससे शिशॠसबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होते हैं। इसमें शिशॠको पेट में à¤à¤‚ठन हो सकती है।
इलाज: इसका उपचार करते समय बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¤‚टीटॉकà¥à¤¸à¤¿à¤¨ दे सकते हैं और शिशॠके खाने-पीने का à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखा जाता है (11)।
पैरासिटिक संकà¥à¤°à¤®à¤£ : यह उन शिशà¥à¤“ं में सबसे अधिक होता है, जो जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ठोस खाना खाते हैं। यह जियारà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ लैमà¥à¤¬à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ (à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का जीवाणà¥) के कारण होता है, जो गंदे पानी और दूषित à¤à¥‹à¤œà¤¨ के साथ शिशॠके पेट में जाता है और बीमार कर सकता है (12)।
नोट : ये सà¤à¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤£ वयसà¥à¤•ों को à¤à¥€ हो सकते हैं, लेकिन शिशà¥à¤“ं का इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® कमजोर होता है, इसलिठवो जलà¥à¤¦à¥€ इनकी चपेट में आ जाते हैं।
2. कोलिक
इसमें शिशॠको गैस बनती है, जिस कारण उसे पेट में दरà¥à¤¦ होता है। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में शिशॠजà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रोता है। कोलिन 5 महीने तक की आयॠके शिशà¥à¤“ं को हो सकता है। अगर आपका शिशॠदिनà¤à¤° में लगà¤à¤— 2 घंटे रोà¤, तो उसके रोने का कारण गैस हो सकती है (13)।
उपचार : शिशॠकी आयॠके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° उसका उपचार किया जाता है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° शिशॠको सिमेथीकॉन दे सकते हैं। इससे पेट के अंदर की गैस बाहर निकल जाती है।
3. खाने से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होना
शिशॠको खाने से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ तब होती है, जब बचà¥à¤šà¥‡ का इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® सही से काम नहीं करता है। वहीं, जब शिशॠखाने को सही से नहीं पचा पाता है, तब वह खाने से मना कर देता है। दोनों मामलों में पेट में दरà¥à¤¦ होता है (14)। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में वो शिशॠजà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होते हैं, जो नई चीजों को खाने की कोशिश करते हैं। कà¤à¥€-कà¤à¥€ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने वाले बचà¥à¤šà¥‡ à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° कर सकते हैं।
उपचार : इसका सबसे अचà¥à¤›à¤¾ उपाय यह है कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ वाले खाने से दूर रखा जाà¤à¥¤ इसके अलावा, अगर बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ वाले खाने को किसी दूसरे खाने के साथ मिकà¥à¤¸ करके खाà¤, तो à¤à¥€ कà¥à¤› हद तक फायदा हो सकता है।
4. गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤à¤¸à¥‹à¤«à¥‡à¤—ल रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸
गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤à¤¸à¥‹à¤«à¥‡à¤—ल रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ (GERD), à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है, जिसमें पेट से à¤à¤¸à¤¿à¤¡ वापस à¤à¤¸à¥‹à¤«à¥ˆà¤—स (à¤à¥‹à¤œà¤¨ नली) में आने लगता है, जिसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प बेचैनी और परेशानी हो सकती है (15)।
उपचार : शिशॠकी उमà¥à¤° और सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ की गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ को समà¤à¤¤à¥‡ हà¥à¤ शिशॠका उपचार किया जाता है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° शिशॠको खाना खिलाने के बाद गोदी में सीधा रखकर उसकी पीठको हलà¥à¤•े से सहलाने के लिठकह सकते हैं (16)। इसके अलावा, रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ से बचने के लिठशिशà¥à¤“ं को खिलाने के दौरान उनके सिर को सीने के सà¥à¤¤à¤° से थोड़ा ऊपर उठाकर खिलाà¤à¤‚।
5. à¤à¤ªà¥‡à¤‚डिसाइटिस
इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में पेट के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में सूजन आ जाती है। पेट के अंदर दबाव बà¥à¤¨à¥‡ से पेट के निचले दाà¤à¤‚ कोने में तेज दरà¥à¤¦ होता है। दरà¥à¤¦ इतना तीवà¥à¤° होता है कि शिशॠलगातार रोता रहता है (17) (18)।
उपचार : इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का इलाज करवाने के लिठशीघà¥à¤° चिकितà¥à¤¸à¤¾ की जरूरत होती है। देरी करने पर à¤à¤ªà¥‡à¤‚डिकà¥à¤¸ फट à¤à¥€ सकता है।
6. आंत में रà¥à¤•ावट
आंत में दो पà¥à¤°à¤•ार की रà¥à¤•ावटें होती हैं:
पाइलोरिक सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¨à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ : पाइलोरिक सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¨à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ (उलà¥à¤Ÿà¥€ और मतली) तब होता है, जब पेट के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ की मांसपेशियां अचानक बढ़ जाती हैं। इससे à¤à¥‹à¤œà¤¨ का पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ छोटी आंत तक ही सीमित रह जाता है (18)। पाइलोरिक सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¨à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ है जो जनà¥à¤® के समय से लेकर 6 महीने के बीच के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती है। इसमें बचà¥à¤šà¥‡ को गंà¤à¥€à¤° उलà¥à¤Ÿà¥€ होती है, जिससे उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ हो सकता है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में शिशॠको हर समय à¤à¥‚ख लगती है, उलà¥à¤Ÿà¥€ होती है और लगातार पेट में दरà¥à¤¦ होता है। सरà¥à¤œà¤¿à¤•ल उपचार से इस समसà¥à¤¯à¤¾ को ठीक किया जा सकता है ।
उपचार: लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी से उपचार किया जाता है।
आंतà¥à¤°à¤¾à¤µà¤°à¥‹à¤§ : आंतà¥à¤°à¤¾à¤µà¤°à¥‹à¤§ वह दशा है, जब आंतों में रà¥à¤•ावट आ जाती है। इससे पाचन तंतà¥à¤° के अंदरूनी हिसà¥à¤¸à¥‡ में सूजन आ जाती है। पेट दरà¥à¤¦, उलà¥à¤Ÿà¥€ और दसà¥à¤¤ इस समसà¥à¤¯à¤¾ के कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£ हैं। यह रोग शिशà¥à¤“ं में कम ही होता है, लेकिन अलà¥à¤¸à¤°à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤µ कोलाइटिस और कà¥à¤°à¥‹à¤¹à¤¨ रोग दो आंतà¥à¤°à¤¾à¤µà¤°à¥‹à¤§ वाले रोग हैं, जो शिशà¥à¤“ं को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकते हैं (20)। ये समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° जेनेटिक की वजह से होती हैं।
उपचार : इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का कोई निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ उपचार नहीं है। सिरà¥à¤« दरà¥à¤¦ व उससे संबंधित लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को कम करने के लिठदवा ही दी जाती है।
7. मूतà¥à¤° संकà¥à¤°à¤®à¤£ :
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को मूतà¥à¤° संकà¥à¤°à¤®à¤£ की समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ हो सकती है (21)। इसमें पेट के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में दरà¥à¤¦ होता हैं और पेशाब करते समय शिशॠको दिकà¥à¤•त होती है।
उपचार : इसके लिठà¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ ही à¤à¤•मातà¥à¤° उपचार है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने वाले शिशà¥à¤“ं में इंटà¥à¤°à¤¾à¤µà¥‡à¤¨à¤¸ थेरेपी का उपयोग करके दवा को सीधे रकà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ में पहà¥à¤‚चाया जाता है (21)।
8. शिशà¥à¤“ं में कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾
à¤à¤• साल से छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में कबà¥à¤œ आम बात है। इस वजह से उनका मल सखà¥à¤¤ होता है, जो मà¥à¤¶à¥à¤•िल से बाहर निकलता है। इससे बचà¥à¤šà¥‡ के पेट में सूजन हो जाती है, जिससे पेट में दरà¥à¤¦ और à¤à¤‚ठन होती है (22)।
उपचार: जिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ ने अà¤à¥€-अà¤à¥€ खाना शà¥à¤°à¥‚ किया है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, दलिया व ओटà¥à¤¸ आदि देने चाहिà¤à¥¤ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पानी à¤à¥€ पिलाना चाहिà¤à¥¤ शिशॠकी मालिश करने से à¤à¥€ कबà¥à¤œ ठीक हो सकती है।
9. गैस की समसà¥à¤¯à¤¾
अगर शिशॠदूध पीते समय बोतल की निपà¥à¤ªà¤² को ठीक से नहीं पकड़ता है, तो दूध के साथ हवा à¤à¥€ पेट में चली जाती है। इससे बचà¥à¤šà¥‡ को गैस बन सकती है। इस दौरान शिशॠबेचैन रहेगा, लेकिन गैस के गà¥à¤œà¤°à¤¨à¥‡ के बाद राहत महसूस करेगा।
उपचार : हालांकि, गैस बनने से शिशॠको कोई गंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं होती, लेकिन शिशॠके पेट की मालिश करके इस समसà¥à¤¯à¤¾ को कà¥à¤› हद तक कम किया जा सकता है। अगर गैस के कारण शिशॠको जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ परेशानी हो रही है, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° दवा दे सकते हैं।
10. टॉकà¥à¤¸à¤¿à¤• पदारà¥à¤¥ खाने से दरà¥à¤¦
शिशॠअपने मà¥à¤‚ह में कà¥à¤› à¤à¥€ सामान डाल लेते हैं, जिस कारण विषैले जीवाणॠव टॉकà¥à¤¸à¤¿à¤• पदारà¥à¤¥ उनके पेट में चले जाते हैं। इस कारण उनके पेट में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ व दरà¥à¤¦ हो सकता है। इससे शिशॠको बचाने के लिठतà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास ले जाना चाहिठऔर सही उपचार करवाना चाहिà¤à¥¤
उपचार : डॉकà¥à¤Ÿà¤° लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को देखने और गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ का आंकलन करने के बाद ही टॉकà¥à¤¸à¤¿à¤• पदारà¥à¤¥ से निपट सकता है। अगर टॉकà¥à¤¸à¤¿à¤• पदारà¥à¤¥ का सà¥à¤¤à¤° अधिक है, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° बचà¥à¤šà¥‡ को उलà¥à¤Ÿà¥€ करवाते हैं। इसके अलावा, बचà¥à¤šà¥‡ को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पानी à¤à¥€ पिलाया जा सकता है, ताकि वह जलà¥à¤¦ टॉकà¥à¤¸à¤¿à¤• पदारà¥à¤¥ को बाहर निकाल सके।
11. मोशन सिकनेस
मोशन सिकनेस असामानà¥à¤¯ है और इससे पेट दरà¥à¤¦ हो सकता है। यह उन शिशà¥à¤“ं में हो सकता है, जो पहली बार हवाई यातà¥à¤°à¤¾ कर रहे हों, बस या कार से जा रहे हों या पहली बार लिफà¥à¤Ÿ का उपयोग करते हैं। इससे पेट में दरà¥à¤¦ व उलà¥à¤Ÿà¥€ हो सकती है।
उपचार: इस दौरान आप उसके साथ खेल सकती हैं, ताकि उसे मोशन सिकनेस से दूर किया जा सके।
12. जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ à¤à¥‚ख से दरà¥à¤¦ होना
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देर तक à¤à¥‚खे रहने से शिशॠको पेट दरà¥à¤¦ हो सकता है। शिशà¥à¤“ं का शरीर बà¥à¤¤à¤¾ रहता है, इस वजह से वो अपनी à¤à¥‚ख को रोक नहीं पाते हैं। वहीं, शिशॠअगर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध पीता है, तो à¤à¥€ उसे पेट दरà¥à¤¦ हो सकता है।
उपचार: अगर बचà¥à¤šà¥‡ को समय-समय पर खिलाया या दूध पिलाया जाà¤, तो उसकी à¤à¥‚ख रोकी जा सकती है। वहीं, जब आपका बचà¥à¤šà¤¾ खाने को उलà¥à¤Ÿà¥€ के जरिठनिकाल देता है, तो इसका मतलब यह है कि उसने जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खा लिया है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपको बचà¥à¤šà¥‡ के फीडिंग शेडà¥à¤¯à¥‚ल के बारे में बेहतर तरीके से बता सकते हैं।
13. शिशà¥à¤“ं को चोट लगना
अकà¥à¤¸à¤° शिशà¥à¤“ं को खेलते हà¥à¤ चोट लग जाती है। शिशॠचलने की कोशिश में फरà¥à¤¶ पर पड़ी किसी à¤à¥€ चीज पर गिर सकता है, जिससे पेट पर चोट लग सकती है। इस कारण शिशॠके पेट में दरà¥à¤¦ हो सकता है।
उपचार: कोशिश करें कि बचà¥à¤šà¥‡ को खेलते हà¥à¤ किसी पà¥à¤°à¤•ार की चोट न लगे। वहीं, अगर आपको लगे कि बचà¥à¤šà¥‡ को कोई अंदरूनी चोट लगी है, तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से जांच करवाà¤à¤‚।
शिशॠको पेट दरà¥à¤¦ में कà¥à¤¯à¤¾ आहार दें?
शिशॠको समà¤à¤¦à¤¾à¤°à¥€ से खिलाना-पिलाना चाहिà¤à¥¤ कà¥à¤› चीजें उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ फायदा पहà¥à¤‚चाती हैं और कà¥à¤› नà¥à¤•सान। शिशॠको पेट में दरà¥à¤¦ होने पर कà¥à¤¯à¤¾ खिलाà¤à¤‚, यहां हम उसी बारे में बता रहे हैं :
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ : मां के दूध में सà¤à¥€ जरूरी पोषक ततà¥à¤µ होते हैं। इससे बचà¥à¤šà¥‡ का पाचन तंतà¥à¤° अचà¥à¤›à¥€ तरह काम करता है और पेट ठीक रहता है (23)।
सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सूप : अगर आपका बचà¥à¤šà¤¾ छह महीने से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उमà¥à¤° का है, तो आप उसे ताजा घर की बनी सबà¥à¤œà¥€ का सूप पिला सकती हैं। तरल à¤à¥‹à¤œà¤¨ पेट के लिठआरामदायक होता है।
फलों की पतली पà¥à¤¯à¥‚री: अपने बचà¥à¤šà¥‡ को फलों की पà¥à¤¯à¥‚री दें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनमें पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक शरà¥à¤•रा होती है, जो ऊरà¥à¤œà¤¾ का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है। इसे बचà¥à¤šà¥‡ के लिठपचाना आसान होता है।
बेबी सीरिल : आप चावल, जौ या जई से बना दलिया बचà¥à¤šà¥‡ को खिला सकती हैं। इनमें फाइबर की मातà¥à¤°à¤¾ अधिक होती है, जिससे कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ दूर होती है। वहीं, चावल से बने खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ à¤à¥€ अचà¥à¤›à¥‡ होते हैं, जो गà¥à¤²à¥‚टन फà¥à¤°à¥€ और पचाने में आसान होते हैं।
शिशà¥à¤“ं में पेट दरà¥à¤¦ कितने समय तक रहता है?
शिशà¥à¤“ं में दरà¥à¤¦ होने के कई कारण हो सकते हैं और दरà¥à¤¦ की अवधि à¤à¥€ उन कारणों पर निरà¥à¤à¤° करती है। शिशà¥à¤“ं की उमà¥à¤° के हिसाब से à¤à¥€ दरà¥à¤¦ के कारणों की पहचान की जाती है और उनका समय पर इलाज किया जा सकता है।
घरेलू उपचार से ठीक करें पेट दरà¥à¤¦ | Bacho Ke Pet Dard Ka Gharelu Upay
गैस की समसà¥â€à¤¯à¤¾ : अगर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने वाले शिशॠको गैस की वजह से पेट में दरà¥à¤¦ हो रहा है, तो मां को मेथी का सेवन नहीं करना चाहिà¤à¥¤
डकार : अगर बचà¥â€à¤šà¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रो रहा है, तो उसे गोद में बैठाकर या कंधे से लगाकर पेट के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ व पीठपर हलà¥â€à¤•े हाथ से सहलाà¤à¤‚, ताकि गैस निकल जाà¤à¥¤
हलà¥à¤•े गरà¥à¤® पानी से नहलाà¤à¤‚ : शिशॠको हलà¥à¤•े गरà¥à¤® पानी से नहलाà¤à¤‚। गरम पानी से पेट का दरà¥à¤¦ कम होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है। अपने शिशॠको टब में सिरà¥à¤« 5-8 मिनट तक के लिये ही बैठाà¤à¤‚ और पानी सिरà¥à¤« उसके पेट तक ही रखें।
गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¾ पानी पिलाà¤à¤‚ : पेट दरà¥à¤¦ में 6 महीने से बड़े शिशà¥à¤“ं को गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¾ पानी पिलाने की सलाह दी जाती है और इसे देने से कोई साइड इफेकà¥â€à¤Ÿ नहीं होता है।
मालिश करें : शिशॠको पीठके बल लेटाकर गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ तेल से उसके पेट की मालिश करें।
दही खिलाà¤à¤‚: 6 महीने से बड़े शिशॠको आप दही à¤à¥€ खिला सकती हैं। खासतौर पर गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के दिनों में इससे शिशॠके पेट को आराम मिलेगा।
चावल का पानी : 6 महीने से बड़े शिशॠको चावल का पानी पिलाने से पेट में ठंडक मिलती है और दरà¥à¤¦ में à¤à¥€ राहत मिलती है।
हींग : बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पेट में दरà¥à¤¦ होने पर थोड़ी-सी हींग पेट पर मलने से à¤à¥€ दरà¥à¤¦ से राहत मिल सकती है। आजकल बाजार में इसके रोल-ऑन à¤à¥€ आसानी से उपलबà¥à¤§ हैं।
शिशॠके पेट दरà¥à¤¦ को कैसे रोकें?
आपके शिशॠके पेट में दरà¥à¤¦ न हो, इसके लिठसावधानियां बरतनी à¤à¥€ जरूरी हैं। इस संबंध में हम यहां कà¥à¤› जरूरी टिपà¥à¤¸ दे रहे हैं (24):
सà¥à¤µà¤šà¥à¤› और साफ à¤à¥‹à¤œà¤¨ : हाइजेनिक à¤à¥‹à¤œà¤¨ उन रोगजनकों से मà¥à¤•à¥à¤¤ होता है, जो दूषित à¤à¥‹à¤œà¤¨ और पानी से फैलते हैं। अपने शिशॠके à¤à¥‹à¤œà¤¨ को हाइजेनिक वातावरण में तैयार करें। हमेशा खाना बनाने से पहले हाथों को अचà¥à¤›à¥€ तरह धोà¤à¤‚ और फलों व सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ पानी से साफ करके ही बनाà¤à¤‚।
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से शिशॠको बचाà¤à¤‚ : आपके बचà¥à¤šà¥‡ को किस तरह के खाने से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होती है, उसे समà¤à¥‡à¤‚।
बचà¥à¤šà¥‡ को ठीक से दूध पिलाà¤à¤‚ : हर बार जब बचà¥à¤šà¤¾ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करता है, तो धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि दूध के साथ हवा उसके मà¥à¤‚ह में न जाà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‡ की सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ पर बहà¥à¤¤ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें : अकà¥à¤¸à¤° शिशॠहाथ में आठकिसी à¤à¥€ सामान को मà¥à¤‚ह में डाल लेते हैं। इससे रोगाणॠबचà¥à¤šà¥‡ के मà¥à¤‚ह और पेट में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करते हैं। इसलिà¤, घर को साफ रखें और धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि बचà¥à¤šà¤¾ कà¥à¤› à¤à¥€ अपने मà¥à¤‚ह में न डाल ले। साथ ही बचà¥à¤šà¥‡ को नियमित रूप से सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करवाà¤à¤‚, ताकि उस पर लगी धूल-मिटà¥à¤Ÿà¥€ साफ होती रहे।
गैस बनाने वाले आहार : सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली माताà¤à¤‚ पà¥à¤¯à¤¾à¤œ, पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€, लहसà¥à¤¨, बà¥à¤°à¥‹à¤•ली, खीरा, लाल मिरà¥à¤š, और काली मिरà¥à¤š का सेवन कम ही करें, ताकि शिशॠको गैस न बने।
पेट का दरà¥à¤¦ शिशॠके लिठदरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• हो सकता है, जो गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾ का कारण à¤à¥€ बन सकता है। इसलिà¤, सावधानी बरतने और सही समय पर डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ उपचार के जरिठबचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पेट दरà¥à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ को ठीक किया जा सकता है। वहीं, जागरूक रहने के लिठलेख में दी गई जानकारी को अचà¥à¤›à¥€ तरह जरूर पढ़ें। आप चाहें, तो इस लेख को अनà¥à¤¯ लोगों के साथ à¤à¥€ साà¤à¤¾ कर सकते हैं। उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करते हैं कि यह लेख आपके शिशॠके बेहतर सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठलाà¤à¤•ारी होगा।
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